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सेना में अहीर रेजिमेंट के गठन की मांग तेज, भोपाल में राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन देगी जन जागृति यात्रा

Bhopal news: भारतीय सेना में अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर मध्य प्रदेश में जनजागृति यात्रा निकाली जा रही है. यात्रा की शुरुआत ग्वालियर से हुई है.19 फरवरी से शुरु हुई यात्रा 26 फरवरी को भोपाल पहुंची है. 25 फरवरी शनिवार को जन जागृति यात्रा भोपाल के बैरसिया में दाखिल हुई थी. जहां बैरसिया […]
Updated At: Feb 26, 2023 14:59 PM
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फोटो: इजहार हसन खान

Bhopal news: भारतीय सेना में अहीर रेजिमेंट गठन की मांग को लेकर मध्य प्रदेश में जनजागृति यात्रा निकाली जा रही है. यात्रा की शुरुआत ग्वालियर से हुई है.19 फरवरी से शुरु हुई यात्रा 26 फरवरी को भोपाल पहुंची है. 25 फरवरी शनिवार को जन जागृति यात्रा भोपाल के बैरसिया में दाखिल हुई थी. जहां बैरसिया नगर के चौपड़ बाजार से लेकर बस स्टैंड तक यात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया. यात्रा में बड़ी संख्या में यादव समाज के युवा शामिल हुए. अहीर रेजिमेंट हक़ हमारा और जय माधव जय यादव के नारे लगा रहे थे. ये यात्रा भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्रांउड पहुंचेगी. जहां पर प्रदेश भर से यादव समाज के लोग शामिल हो रहे हैं.

यादव समाज की अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग कई वर्षों से पूरे देश भर में चल रही है, साथ ही बड़े-बड़े आंदोलन पूरे देश में हो रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा किसी तरह का ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इसी को लेकर भोपाल में रविवार को बड़ा आंदोलन समाज की ओर से किया जा रहा है ,जिसमें देश भर के रिटायर फौजी नेता सामाजिक संगठन से जुड़े पदाधिकारी एवं युवा भोपाल पहुंच चुकें है.जन जागृति यात्रा का समापन आज भोपाल के एमवीएम कॉलेज ग्राउंड में होगा.

इस मौके पर समाज की ओर से राज्यपाल मंगू भाई पटेल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया जाएगा. इस कार्यक्रम में पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अरूण यादव, पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव समेत अन्य नेता भी शामिल होगे.

यादव समाज ने कहा अहीर रेजीमेंट हक है हमारा
यादव समाज के नेताओं का कहना हैं कि देश की सुरक्षा को लेकर फर्स्ट और सेकंड वर्ल्ड वॉर समेत सभी युद्धों में यादव सैनिकों का गौरवशाली योगदान रहा है. द्वितीय विश्व युद्ध में हरियाणा के कोसली गांव के 243 यादव सैनिक शहीद हुए. 1962 में चीन के विरुद्ध रेजांगला, कारगिल युद्ध में भी यादव सैनिकों ने शहादत दी. जब जातिगत आधार पर जाट, सिख, राजपूत, डोगरा, मराठा रेजिमेंट बनी हुई है. ऐसे में सरकार को अहीर रेजिमेंट बनाने का निर्णय लेना चाहिए. अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग लंबे समय से लंबित है. जिससे समाज स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है.

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1962 चीन भारत जंग रेजांगला पोस्ट को बचाने वाले वीर अहीर, VCR CAP.रामचंद्र जी, भोपाल जनजागृति यात्रा में शामिल।

यादव महासभा के महासचिव दामोदर सिंह यादव ने सभी समाज के लोगों से विशेषकर युवाओं से अपील करते हुए कहा कि अहीर रेजिमेंट हमारे लिए एक बड़ा मुद्दा बन चुका है. जब तक हम अहीर रेजिमेंट नहीं बनवा लेंगे तब तक हम शांति से घर नहीं बैठेंगे. और यह जो हमारे नौजवान साथी हैं हरियाणा के साथी हैं नोएडा के साथी हैं. यह साथी प्रयास कर रहे हैं, भोपाल के साथी भी प्रयास कर रहे हैं. आप इन सबको सहयोग प्रदान करें आप यह मानें कि यह यात्रा दामोदर सिंह यादव की यात्रा नहीं बल्कि पूरे समाज की यात्रा है.

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कैसे शुरू हुई अहीर रेजिमेंट की मांग
अहीर जवानों को अलग-अलग रेजिमेंट में भर्ती किया जाता है. उन्हें कुमायूं,जाट,राजपूत और अन्य रेजिमेंट में अलग-अलग जाति के जवानों के साथ भर्ती किया जाता है. उन्हें ब्रिगेड ऑफ गार्ड, पैराशूट रेजिमेंट,आर्मी सर्विस कॉर्प, आर्टिलरी इंजीनियर, सिग्नल्स में भर्ती किया जाता है.अहिरों को शुरुआत में 19वें हैदराबाद रेजिमेंट में भर्ती किया गया.इस रेजिमेंट में पहले यूपी के राजपूतों और दक्षिण के मुसलमानों व अन्य जाति के लोगों को भर्ती किया जाता था. वर्ष 1902 में निजामों से जुड़ी रेजिमेंट को ब्रिटिश बेस के तौर पर स्थायी रूप से बनाया गया. 1922 में 19 हैदराबाद रेजिमेंट को बदलकर डेक्कन मुस्लिम में तब्दील किया गया.1930 में इसमे कुमांयूनी,जाट,अहिर और अन्य जाति के लोगों को शामिल किया गया.

अहीर रेजिमेंट की मांग के इतिहास पर नजर डालें तो अहिरवाल क्षेत्र के जवानों ने सेना में अपना काफी योगदान दिया है. अहरिवाल क्षेत्र दक्षिणी हरियाणा के जिले रिवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम में आता है, इसका खास संबंध राव तुला राम से है, जिन्होंने 1857 की क्रांति में अपने शौर्य का परिचय दिया था. इसी क्षेत्र से अहीर रेजिमेंट की सबसे पहले मांग उठी थी, जिसके बाद इस मांग को अहीर आबादी वाले क्षेत्रों ने आगे बढ़ाया.

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1962 के युद्ध में योगदान
1962 के युद्ध में जिस तरह से अहीर सैनिकों ने रेजंग ला में अपना शौर्य दिखाया उसे कोई नहीं भूल सकता है. इस कंपनी के अधिकतर जवान 13वीं बटालियन में अहीर थे, जिन्होंने चीनी सैनिकों का डटकर सामना किया. अहीर समुदाय के सदस्य लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं कि सेना में एक अलग अहीर रेजिमेंट होनी चाहिए. 1962 युद्ध के 50 वर्ष पूरे होने के मौके पर 2012 में एक बार फिर से इस मांग में तेजी आई और कई राजनीतिक दलों ने भी इस मांग को आगे बढ़ाते हुए इसे बल दिया.

अलग-अलग राजनीतिक दलों ने मांग को आगे बढ़ाया
अलग-अलग राजनीतिक दलों ने अहीर रेजीमेंट की  मांग को आगे बढ़ाया वर्ष 2018 में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर अहीर रेजिमेंट की मांग थी. इसी साल 15 मार्च को कांग्रेस सांसद दीपेंदर सिंह हुडा ने राज्यसभा में यदुवंशी शौर्य का जिक्र किया था. इसके पहले 11 फरवरी को बसपा सांसद श्याम सिंह यादव ने भी अहीर रेजिमेंट की मांग को आगे बढ़ाया था. बिहार में लालू प्रसाद की बेटी राज लक्ष्मी यादव ने इस मांग को 2020 में विधानसभा चुनाव में उठाया था. सपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने घोषणापत्र में अहीर रेजिमेंट का वादा किया था. बीते दिनों मध्य प्रदेश पीसीसी चीफ और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सेना में अहीर रेजिमेंट की स्थापना करने की मांग की हैं. अब फिर मध्यप्रदेश के गुना से सांसद के पी यादव ने अहीर रेजिमेंट बनाने की मांग की है.

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