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Rath Yatra: पुरी की तर्ज पर बेगमगंज में 200 सालों से निकल रही रथयात्रा, दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु

राजेश रजक

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न्यूज़ हाइलाइट्स

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सनातन धर्म में जगन्नाथ रथ यात्रा का बहुत ही खास महत्व है.

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रायसेन जिले के बेगमगंज में 200 वर्षों से अधिक समय से जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा निकल जा रही है.

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बेगमगंज में पुरी की तर्ज पर रथयात्रा निकाली जाती है.

Jagannath Rath Yatra 2024: सनातन धर्म में जगन्नाथ रथ यात्रा का बहुत ही खास महत्व है. रायसेन जिले के बेगमगंज में 200 वर्षों से अधिक समय से जगन्नाथ स्वामी की रथ यात्रा निकल जा रही है. हर साल इस रथ यात्रा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ता है.  

भगवान जगन्नाथ की मुख्य लीला भूमि ओडिशा की पुरी है. पुरी में भव्य रथ यात्रा का आयोजन किया जाता है. पुरी की तर्ज पर ही रायसेन के बेगमगंज में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाती है, जिसके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

Jagannath_Rathyatra

रथ पर सवार होकर निकलते हैं भगवान

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा श्रीजगदीश मंदिर से निकलती है. हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में विधिविधान से पूजा अर्चना की जाती है. इसके बाद भगवान जगन्नाथ उनके ज्येष्ठ भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के साथ रथ में सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं.

200 वर्षों से निकल रही रथयात्रा

बेगमगंज में यह रथ यात्रा 200 वर्षों से निकाली जा रही है. हालांकि विशाल रथ यात्रा का नगर भ्रमण 1964 से से शुरू हुआ.  जगन्नाथ स्वामी की नगर भ्रमण रथ यात्रा इस बार 60वें वर्ष में प्रवेश कर गई है.

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मुख्य मार्गों से निकली रथयात्रा

प्रतिवर्ष आषाण महीने में शुल्क पक्ष द्वित्तीया को साक्षात जगन्नाथ स्वामी अपने ज्येष्ठ भाई  बलभद्र   एवं  बहन सुभद्रा  के साथ जगत कल्याणार्थ 15 फीट ऊंचे नन्दीघोष, तालध्वज और दर्पदलव नाम के रथों पर विराजमान होकर जन-जन तक स्वयं पहुंचे. रविवार को जगन्नाथ स्वामी की भव्य रथ यात्रा निकाली गई. ये यात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए दशहरा मैदान स्थित मंदिर पर रात्रि में पहुंची. यहां पर यात्रा का रात्रि विश्राम हुआ. सोमवार को दोपहर में भगवान जगन्नाथ स्वामी वापस अपने भाई , बहन के साथ घर पहुंचेंगे.

200 गांवों से दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालु

यात्रा में अश्वारोही दल, ध्वाजाओं, पताकाओ के साथ भक्तों की टोली, जय बलदाऊ - जय सुभद्रा , जय जय जय के जयघोष के साथ रथ की अगवानी एवं जगह -जगह श्रद्धालुओं द्वारा पूजा अर्चना के साथ आरती उतारते हुए पुष्प वर्षा कर अभिवादन किया गया. रथ यात्रा के पीछे-पीछे पुरुष एवं महिलाओं का जत्था ढोल-मंजीरों पर संकीर्तन करता हुआ चल रहा था. करीब 200 गांवों से अधिक हजारों श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचे. प्रशासन द्वारा रथ यात्रा मार्ग पर यातायात व्यवस्था चाकचौबंद कर दी गई थी ताकि भीड़ के कारण किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न ना हो सके.

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