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फरार अक्षय कांति बम को मिली जमानत से क्या कम हो जाएगी BJP की मुश्किलें? कांग्रेस छोड़कर ज्वाइन की थी बीजेपी

धर्मेंद्र कुमार शर्मा

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बीजेपी नेताओं के साथ अक्षय बम
बीजेपी नेताओं के साथ अक्षय बम
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MP Lok Sabha Election: मध्य प्रदेश लोकसभा चुनाव के दौरान इंदौर लोकसभा सीट और उसके कांग्रेस प्रत्याशी न सिर्फ मध्य प्रदेश में चर्चा में रहे बल्कि, पूरे देशभर में चर्चाओं में रहे हैं. चर्चा में रहने का कारण चुनाव के ठीक पहले नामांकन वापस लेना, जिसके बाद इंदौर लोकसभा सीट पर कांग्रेस चुनाव ही नहीं लड़ सकी. लेकिन 17 साल पुराने जमीनी विवाद के केस में ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ 24 अप्रैल को धारा 307 बढ़ाने के आदेश दिए थे. जिसके बाद से ही अक्षय बम फरार चल रहे थे. उसी मामले में आज कोर्ट ने उनको अग्रिम जमानत दी है. अब देखना होगा कि बम को जमानत मिलने के बाद बीजेपी को फायदा होता है या फिर नहीं.

आपको बता दें इंदौर समेत देश की राजनीति में उस समय भूचाल आ गया था. जब इंदौर से कांग्रेस प्रत्याशी अक्षय बम ने अपना नामांकन वापस ले लिया था. ऐसा माना जा रहा था कि अक्षय बम के नामांकन वापस लेने के पीछे की वजह उनका 17 साल पुराना एक केस है. ऐसा इसलिए, क्योंकि केस में 307 धारा ऐड होने के 5 दिन बाद ही अक्षय बम ने कांग्रेस छोड़ दी थी. 

 

 

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सुबह किया प्रचार, 2 घंटे बाद छोड़ दी कांग्रेस

जिस वक्त अक्षय बम ने कांग्रेस छोड़ी थी, उसी दिन वे सुबह से ही कांग्रेस के पक्ष में प्रचार कर रहे थे. लेकिन उसके ठीक 2 घंटे बाद अक्षय अचानक अपना नामांकन पत्र वापस ले लेते हैं. जिसके बाद पूरे देश भर में इंदौर लोकसभा सीट की चर्चाएं होती हैं. 

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उस समय अक्षय के इस फैसले को बताया था BJP प्लानिंग

जिस समय अक्षय बम ने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थामा था, उस समय ऐसा माना जा रहा था कि ये सबकुछ प्लान बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय और उनके खास रमेश मेंदोला ने किया है. उन्हीं ने अक्षय बम को बीजेपी में लाने की पूरी तैयारी की थी, लेकिन बाद में विजयवर्गीय के एक बयान पूरी पिक्चर को ही बदल दिया था.

कैलाश विजयवर्गीय ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था, "अक्षय को बीजेपी में लाने का कोई प्लान नहीं था. सब कुछ अचानक हुआ था. मैं फॉर्म वापस करवाने गया भी नहीं था. मैं तो रास्ते में मिला था, क्योंकि कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया था. इसलिए मैं पहुंचा और हम लोगों ने बात की." बता दें कि उस समय कैलाश विजयवर्गीय की एक सेल्फी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई थी. 

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नोटा कैंपेन ने बढ़ाई बीजेपी की टेंशन

अक्षय बम पर लगे तमाम आरोपों के बाद बीजेपी और बीजेपी नेताओं की काफी किरकिरी हुई थी. इसके साथ ही कांग्रेस के नोटा कैंपेन ने बीजेपी के लिए मुसीबत खड़ी कर दी थी. यही कारण है कि बीजेपी ने आनन-फानन में रात 1 बजे बीजेपी के सभी दिग्गज नेताओं की बैठक आयोजित की थी. जिसमें साफतौर पर कांग्रेस के नोटो कैंपेन को लेकर चर्चा की गई थी. अब आने वाली 4 तारीख को पता चलेगा कि बीजेपी के लिए अक्षय बम का कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आना फायदेमंद हुआ या फिर नुकसानदायक, ऐसा इसलिए क्योंकि माना जा रहा है कि इंदौर लोकसभा सीट पर नोटा काफी सुर्खियों में रहा है.

17 साल पुराना है मामला

मामला 17 साल पुराना है. साल 2007 में फरियादी युनूस पटेल के खेत पर विवाद हुआ था. इसमें अक्षय बम और उनके पिता पर फायरिंग और बलवा आदि के आरोप थे. पुलिस ने सिर्फ हमला, मारपीट और धमकाने की रिपोर्ट दर्ज की थी. आरोप है कि युनूस पर गोली भी चलाई गई थी. लेकिन, खजराना पुलिस ने FIR में हत्या के प्रयास की धारा नहीं जोड़ी थी. इसी के खिलाफ युनूस ने ट्रायल कोर्ट में आवेदन दिया था.

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