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MP Chunav: कांग्रेस के दिग्गज मैदान में क्यों नहीं टिक पाए? करारी हार के ये हैं 7 बड़े कारण

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MP Loksabha Election: देश भर में लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मध्य प्रदेश में शानदार जीत मिली है. प्रदेश की सभी 29 सीटों पर बीजेपी का कब्जा रहा है. कई सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की हार का मार्जिन बहुत बड़ा रहा है. यहां तक कई दिग्गज कांग्रेसी अपना किला भी नहीं बचा पाए तो कई अपना किला वापस लेने में नाकामयाब दिखाई दिए. यही कारण रहा है कि एक तरफ जहां देश भर में कांग्रेस ने अच्छा प्रदर्शन किया है तो वहीं दूसरी तरफ मध्य प्रदेश में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया हे. आइये जानते हैं इसके पीछे की क्या वजह रही है. 

चुनाव हारने के पीछे का एक कारण ये भी?

लोकसभा चुनाव के पहले और लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने अपने कार्यकताओं के साथ भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था. जिसमें कई विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद भी शामिल हैं. जिस कारण कांग्रेस कार्यकर्ता और नेताओं का मनोबल कमजोर हुआ था. यही कारण है कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और अन्य नेताओं की मेहनत का कोई असर लोकसभा चुनाव में देखने को नहीं मिला है.

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ये हैं कांग्रेस के बड़े दिग्गजो के नाम 

1. कमलनाथ: लोकसभा चुनाव में छिंदवाड़ा के प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने छिंदवाड़ा से चुनाव लड़ा भले ही न लड़ा हो, पर पूरी मेहनत कमलनाथ की थी. चुनाव के दौरान उनके बेटे नकुलनाथ का बस केवल नाम ही थी. लेकिन पार्टी को यहां भी अपेक्षित की सफलता नहीं मिली. लगातार पार्टी में हुई टूट के कारण कांग्रेस अपना आखिरी किला भी हार बैठी. 

2. दिग्विजय सिंह: लोकसभा चुनाव में राजगढ़ के प्रत्याशी और पूर्व मुख्यमंत्री  दिग्विजय सिंह ने भी चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्होंने 77 साल की उम्र में पैदल यात्रा करके चुनाव प्रचार किया था. इसके साथ ही वे EVM की गड़बड़ी को लेकर भी सवाल उठाते रहे. राजगढ़ के मैदान में उनके बेटे और वे दोनों ही प्रचार में लगे रहे. ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी के बड़े नेताओं का साथ न मिलने के कारण दिग्विजय सिंह अपना आखिरी चुनाव हार गए हैं. 

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3. फूल सिंह बरैया: फूल सिंह बरैया कांग्रेस बड़े दलित नेता हैं. वे इस समय भांडेर विधानसभा से विधायक भी हैं. पार्टी ने भिंड लोकसभा सीटसे प्रत्याशी बनाया था. यहां से उन्होंने बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी. यहां कांग्रेस की हार के पीछे बहुजन समाज पार्टी को कारण माना जा रहा है. क्योंकि कांग्रेस के बागी देवाशीष जरारिया ने 1 लाख से अधिक वोट प्राप्त किए. जो मूल रूप से कांग्रेस के ही वोट थे. यही कारण है कि कांग्रेस को भिंड लोकसभा सीट बड़े कम मार्जिन के साथ हारनी पड़ी है.

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ये हैं कांग्रेस हारने के सात मुख्य कारण

1. मध्य प्रदेश में बीजेपी के कई दिग्गज नेताओं ने जनसभा से लेकर रोड शो तक किया. इसके साथ राम मंदिर और मोदी लहर का असर देखने को मिला है. 

2. कांग्रेस अपनी बात जनता तक पहुंचाने में कामयाब नहीं हो पाई. इसके पीछे का कारण लगातार कमजोर होता कांग्रेस का ढांचा था. जो चुनाव में कोई जान नहीं फूंक पाया.

3. कांग्रेस के अंदर आतंरिक संघर्ष और गुटबाजी भी हार का कारण बनी है. पार्टी में नेताओं के बीच सामंजस्य की कमी के कारण संगठन कमजोर दिखाई पड़ा. 

5. भाजपा ने राज्य में विकास के मुद्दों को प्राथमिकता दी इसके साथ ही लाड़ली बहना योजना को भी मुद्दा बनाया. 

6. मतदाताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं का समर्थन किया. जिससे भाजपा को बड़ा फायदा हुआ है. प्रदेश की कई सीटों पर प्रत्याशियों ने लाखों की लीड से जीत दर्ज की है. जो प्रत्याशी विधानसभा चुनाव में हार चुके थे. वे भी इस चुनाव में जीत चुके हैं.

7. चुनाव के बीच में जीतू पटवारी का पूर्व मंत्री इमरती देवी को लेकर दिया गया बयान सुर्खियों में रहा. जिसे बीजेपी ने मुद्दा बना लिया था. कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे ने पार्टी छोड़ने के पीछे का कारण जीतू पटवारी द्वारा दिए गए बयान को बताया था.

इनपुट- एमपीतक के लिए Khushi Baishander की रिपोर्ट

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