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MP: नर्सिंग घोटाले को लेकर दिग्विजय सिंह ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, पूर्व CM शिवराज और विश्वास सारंग पर लगाए गंभीर आरोप

रवीशपाल सिंह

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Nursing College Scam: मध्यप्रदेश का नर्सिंग कॉलेज घोटाला सुर्खियों में है. कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर हमलावर है. पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने पीएम नरेंद्र मोदी को नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाडे़ को लेकर चिट्ठी लिखी है. उन्होंने प्रधानमंत्री से इस फर्जीवाडे में पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग को जांच के दायरे में लेने की मांग की है. 

दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

दिग्विजय सिंह ने पीएम मोदी को भेजे पत्र में लिखा है, "मध्यप्रदेश में विगत एक दशक से गूंज रहे व्यापम भर्ती घोटाले की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि एक और नर्सिंग कॉलेज घोटाले ने राज्य की साख को तार-तार कर दिया है. इस मामले में राज्य सरकार की जिम्मेदार एजेंसियों और शीर्ष स्तर के राजनेता से लेकर नौकरशाह तक पूर्ण रूप् से लिप्त और हिस्सेदार हैं. हाल ही में आपकी बहुचर्चित एजेंसी सी.बी.आई. के अफसरों ने भी करोड़ों रूपये की रिश्वत खाकर म.प्र. उच्च न्यायालय के आदेश पर अब तक की गई जांच को संदिग्ध बना दिया है. 

पूर्व सीएम शिवराज और मंत्री सारंग पर लगाए गंभीर आरोप

पत्र में लिखा है, "पिछली सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान उनके अति करीबी मंत्री विश्वास सारंग इस नर्सिंग घोटाले से बच निकलने के लिये लगातार प्रयास कर रहे हैं. उनकी नाक के नीचे और संरक्षण प्राप्त नौकरशाहों ने करोड़ों रुपये का लेनदेन कोरोना काल में सारे मापदंडों के विरूद्ध जाकर सैंकड़ों की तादाद में नर्सिंग कॉलेज खोलने की अनुमति शिक्षा माफिया को प्रदान कर दी."

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मंत्रियों पर खड़े किए सवाल

दिग्विजय सिंह ने आगे लिखा, "तत्कालीन मंत्री परिषद के सदस्यों की शह पर अफसरों ने म.प्र. नर्सिंग शिक्षण संस्था मान्यता अधिनियम 2018 की धज्जियां उड़ाते हुए 300 से अधिक नर्सिंग कॉलेज खुलवा दिये. इन फर्जी कॉलेजों में न पर्याप्त स्थान था, न ही वांछित बिस्तरों का अस्पताल. यही नहीं माइग्रेट फेकल्टी के नाम पर दूसरे राज्यों के शिक्षकों को इन संस्थाओं में कार्यरत दिखाकर धोखाधड़ी की. शिक्षा माफिया और अफसरों के गठजोड़ ने हजारों छात्रों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है. मंत्री स्तर से संरक्षण प्राप्त विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव से लेकर आयुक्त/संचालक तकनीकी शिक्षा ने नर्सिंग डिग्री और डिप्लोमा जैसे कोर्स की विश्वसनीयता संदिग्ध बना दी. मध्यप्रदेश सहित बाहर के राज्यों के नौजवानों के एडमिशन कागजी खानापूर्ति के लिये खुली छूट दे दी. बिना नर्सिंग कॉलेज में पढ़े डिग्री/डिप्लोमा प्राप्त ये हजारों छात्र प्रदेश के करोड़ों लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर जनता से द्रोह किया गया है."

दिग्विजय ने घोटाले को बताया व्यापम-2

दिग्विजय सिंह ने लिखा, "मेरे द्वारा इस मामले की जांच के लिये महामहिम राज्यपाल महोदय को 10.09.2023 को पत्र लिखकर करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार की लोकायुक्त या ई.ओ.डब्ल्यू. से जांच कराने की मांग की थी. (जिसकी प्रति संलग्न है) लेकिन जांचों की परतों में फंसने के डर से शीर्ष राजनेता और मंत्री इस ‘‘व्यापम-2’’ जैसे घोटाले से बचने की कोशिश करते रहे. इस बीच अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और एन.जी.ओ. में काम करने वाले लोगों ने हाई कोर्ट की ग्वालियर बैंच में उच्च स्तरीय जांच के लिये याचिका लगाई. जिस पर संज्ञान लेकर कोर्ट ने सी.बी.आई. जांच के आदेश दे दिये. मामला सी.बी.आई. की स्थानीय ईकाई के पास जांच के लिये आया. भ्रष्टाचार में गले-गले तक डूबे राज्य सरकार के अफसरों और फर्जी कॉलेजों को बचाने के लिये कॉलेज संचालकों ने सी.बी.आई. अफसरों को ही रिश्वत के जाल में समेट दिया."

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सरकार पर साधा निशाना

"एक-एक फर्जी कॉलेज को ‘‘सही संचालन की टीप’’ के एवज में केन्द्रीय जांच एजेंसी सी.बी.आई. के अफसरों ने लाखों रूपये एक-एक कॉलेज संचालकों से लिये और करोड़ो रूपये की वसूली की.  आपके नारे ‘‘न खाऊंगा, न खाने दूंगा’’ की बात को सी.बी.आई. के अफसरों ने हवा में उड़ा कर नर्सिंग कॉलेजों का भंडाफोड़ करने की जगह दलालों के माध्यम से करोड़ों रूपये बटोर चुके हैं. वो तो भला हो दिल्ली में बैठे सी.बी.आई. अफसरों का जिन्होंने भोपाल में कार्यरत सी.बी.आई. के अफसरों को पर्याप्त साक्ष्य एवं दस्तावेज एकत्र कर रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया है. दिल्ली मुख्यालय से दोषी अफसरों को सेवा से बर्खास्त कर एफ.आई.आर. दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया है. डायरेक्टर सी.बी.आई. का यह कदम स्वागत योग्य है. लेकिन करोड़ों के इस भ्रष्टाचार में चुप्पी साधे बैठी मध्यप्रदेश सरकार ने अपने यहां के दोषी कर्मचारियों को सेवा से बेदखल नहीं किया है. नर्सिंग घोटाले की जांच के साथ-साथ ‘‘व्यापम घोटाले’’ के प्रकरणों में आरोपियों को क्लीनचिट दी गई थी, ऐसे संदिग्ध प्रकरणों की पुनः जांच कराने का निर्णय लिया जाये." 

मध्य प्रदेश सरकार जांच नहीं कराना चाहती- दिग्विजय

दिग्विजय सिंह ने मांग करते हुए लिखा, "व्यापम के प्रकरणों के अनेक मामले संदिग्ध अधिकारियों ने बिना पूर्व जांच किये क्लोजर रिपोर्ट लगाई थी. मेरा आपसे अनुरोध है कि दिल्ली मुख्यालय में पदस्थ ईमानदार पुलिस अफसरों की एक ‘‘स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम’’ गठित कर माननीय उच्च न्यायालय के माननीय सिटिंग जज की देखरेख में समय-सीमा तय करते हुए मध्यप्रदेश में संचालित समस्त मान्यता प्राप्त नर्सिंग कॉलेजों की जांच कराई जाये. क्योंकि मध्यप्रदेश सरकार स्वतः फंसने के डर से मामले की गहराई से जांच कराना नहीं चाह रही है. केन्द्रीय स्तर से सी.बी.आई. जांच कराने पर भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारी, शिक्षा माफिया और सी.बी.आई. के स्थानीय अफसरों पर शिकंजा कस सकेगा तथा ऐसे दोषी अफसर जेल भी जायेंगे और सेवा से भी बर्खास्त होंगे. सहयोग के लिए मैं आपका आभारी रहूंगा."

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