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Jyotiraditya Scindia: ज्योतिरादित्य सिंधिया का चला जादू, मोदी कैबिनेट में मंत्री की शपथ लेकर पिता माधवराव को छोड़ दिया पीछे

विकास दीक्षित

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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ली मंत्री पद की शपथ
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ली मंत्री पद की शपथ
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Jyotiraditya Scindia Profile: नरेंद्र मोदी आज तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ले ली है. इसके बाद गुना लोकसभा सीट से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी मंत्री पद की शपथ ले ली है. बता दें चार साल पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए सिंधिया ने गुना लोकसभा सीट से बंपर जीत हासिल की है. सिंधिया ने मोदी सरकार में लगातार दूसरी बार मंत्री पद की शपथ ली हैं. MP Tak आपको बता रहा है ज्योतरादित्य सिंधिया की कहानी...

आपको बता दें की साल 2020 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद ज्योतरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश कोटे से बीजेपी राज्यसभा सांसद बनाया था. इसके बाद उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय की कमान सौंपी थी. आज वे मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में शपथ लेने जा रहे हैं. अब देखना होगा कि इस बार उन्हें कौन सा मंत्रालय दिया जा रहा है. 

कैसे हुई सिंधिया की राजनीति में एंट्री?

ज्योतिरादित्य सिंधिया का जन्म 01 जनवरी 1971 को महाराष्ट्र में हुआ था. माधवराव सिंधिया व माधवी राजे के पुत्र ज्योतिरादित्य भारतीय राजनीति में जाना पहचाना नाम है.  ज्योतिरादित्य सिंधिया के राजनीतिक करिअर की शुरूआत उनके पिता की मृत्यु के बाद शुरू हुई थी. 

साल 2002 में अचानक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में माधवराव सिंधिया यानि कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता का निधान हो गया था और तभी से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने पिता के संसदीय क्षेत्र गुना से उनके स्थान पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था. 

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पिता से माधवराव से ज्यादा बार केंद्र में मंत्री बनेंगे ज्योतिरादित्य 

1984 के चुनाव में माधवराव सिंधिया को मंत्री के रूप में पहली बार शामिल किया गया था. पीएम राजीव गांधी ने उन्हें रेल मंत्री (22 अक्टूबर 1986 - 1 दिसंबर 1989) बनाया. मतलब उन्हें तीन बार केंद्र में मंत्री बनने का मौका मिला, लेकिन अब ज्योतिरादित्य सिंधिया चौथी बार मंत्री बनेंगे और अपने पिता से आगे निकल जाएंगे.

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इसके बाद 1991 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव ने उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्री बनाया. 1992 की शुरुआत में इनमें से एक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, हालांकि इसमें किसी की जान नहीं गई, लेकिन नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सिंधिया ने तुरंत इस्तीफा दे दिया. हालांकि प्रधानमंत्री राव ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया. बाद में 1995 में मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में सिंधिया को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया. 

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कैसा रहा सिंधिया का राजनीतिक सफर

गुना संसदीय क्षेत्र सिंधिया परिवार का बहुत मजबूत क्षेत्र रहा है. यही वजह है, कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को 2002 के लोकसभा उप चुनाव में 4.50 लाख वोटों से जीत मिली थी. साल 2007 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को केंद्रीय संचार और सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री के रूप में केंद्र में जगह मिली थी. तो वहीं  साल 2009 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री बनाया गया था.

इसके अतिरिक्त वर्ष 2012 में ज्योतिरादित्य सिंधिया विद्युत राज्यमंत्री के रूप में उभर कर सामने आए थे. वर्ष 2013 में ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश से अभियान समिति के प्रमुख के रूप में चुने गए थे.

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साल 2019 में सिंधिया करना पड़ा था हार का सामना

वर्ष 2002 से वर्ष 2019 तक ज्योतिरादित्य सिंधिया हमेशा से लोकसभा के चुनाव में विजयी रहे हैं. लेकिन, उनके ही सहयोगी कृष्णपाल सिंह यादव ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में चुनाव हरा दिया था. हालांकि, लोकसभा चुनाव हारने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया क्षेत्र में सक्रिय बने रहे. तत्कालीन कमलनाथ सरकार से समर्थन वापिस लेकर मप्र में भाजपा को समर्थन दिया और शिवराज सिंह चौहान को दोबारा मुख्यमंत्री पद दिलाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. 

बीजेपी ने 2021 में ज्योतिरादित्य सिंधिया को राज्यसभा सांसद बनाया. ज्योतिरादित्य सिंधिया को मोदी सरकार में सिविल एवियेशन व इस्पात मंत्री बनाया गया. ज्योतिरादित्य सिंधिया को 2024 में भाजपा ने गुना संसदीय सीट से टिकिट दिया जिसके बाद सिंधिया ने रिकॉर्ड 5 लाख 40 हजार 929 वोटों से जीत हांसिल की है.

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