क्या फिर अटक जाएगा महिला आरक्षण बिल? उमा भारती ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा पत्र

नवेद जाफरी

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Women Reservation Bill: 27 सालों से संसद में अटके महिला आरक्षण बिल की चर्चा जोरों पर है. इसी बीच मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने बड़ा बयान दिया है. उमा भारती ने प्रधानमंत्री (PM Modi) को पत्र लिखकर संशोधन की मांग उठाई है. उन्होंने 1996 की याद दिलाते हुए कहा कि उनके संशोधन की मांग उठाने की वजह से ही ये बिल पेंडिंग हो गया था. गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के मौके पर उमा भारती सीहोर के प्रसिद्ध सिद्धि विनायक मंदिर में दर्शन के लिए गईं थीं, इसी दौरान उन्होंने ये बयान दिया.

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इस वजह से पेंडिंग हुआ था बिल

पूर्व सीएम उमा भारती ने महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill In Parliament) को लेकर कहा, ‘यह विधेयक 1996 में देवगौड़ा जी ने प्रस्तुत किया, तब भी हमने इसका बहुत स्वागत किया था. लेकिन यह फिर स्टेंडिंग कमेटी को चला गया था, वो संशोधन मैंने ही प्रस्तुत किया था. वह संशोधन मैंने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र के माध्यम से भेजा है. इस बिल का बहुत स्वागत किया है, लेकिन मैंने उस समय संशोधन की मांग देवगौड़ा जी से की थी, इसलिए बिल पेंडिंग हो गया था. इसलिए मुझे पूर्ण विश्वास है प्रधानमंत्री इस बिल को उस संशोधन को पारित करेंगे.

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उमा भारती ने कहा कि मैं संशोधन की चर्चा अभी इसलिए नहीं कर सकती, क्योंकि प्रधानमंत्री को सुबह ही पत्र लिखा है. हमारी अपनी पार्टी की सरकार है, वह संशोधन आज ही जाता है तो मुझे अलग से चर्चा करने की जरूरत नहीं होगी.

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जन आक्रोश यात्रा पर बोला हमला

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने कांग्रेस की जन आक्रोश यात्रा (Jan Akrosh Yatra) को लेकर जमकर हमला बोला. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जनआक्रोश यात्रा की क्या जरूरत थी ? जनता में आक्रोश होगा तो वोट दिखाई दे जाएगा. मुझे तो यह डर लग रहा है कि यात्रा पर ही आक्रोश नहीं टूट पड़े.

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सनातन राजनीति का विषय नहीं

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सनातन धर्म को लेकर कहा कि इसको राजनीतिक मंच से बिलकुल डिस्कस नहीं किया जाए. यह राजनेताओं का विषय नहीं है, यह विद्वानों संतो महापुरुषों का विषय है. वही इसको आपस में तय करेंगे. तमिल नाडु के डीएमके नेताओं की बात वह तो हमेशा से तिलक काटते रहे. उस विषय को सार्वजनिक तौर पर राजनेतिक मंच पर लाना यह सनातन धर्म के लिए उचित नहीं. मैं सभी पार्टियों से आग्रह करूंगी आप तो रोटी कपड़ा और मकान की बहस कीजिए, सनातन धर्म की बहस विद्वानों पर छोड़ दीजिए.

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