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MP Politics: सांसद न होता तो चाकू चलाता, नशा करता...BJP सांसद का बयान हुआ वायरल, जानें क्यों कहा ऐसा?

विजय कुमार

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MP Politics News: "मैं सांसद न होता तो चाकू चलाता, नशा करता..." ये बयान रीवा संसदीय सीट से नवनिर्वाचित भाजपा सांसद जनार्दन मिश्र का है. भरी भीड़ में सांसद जनार्दन मिश्र ने लोगों को बताया कि वह छात्र जीवन में कितने बिगड़ैल थे. उन्होंने ये भी बताया कि अपनी हरकतों के चलते उन्हें स्कूल से रेस्टीकेट कर दिया गया था. बीजेपी सांसद का ये बयान अब तेजी से वायरल हो रहा है. आइए जानते हैं कि पूरा माजरा क्या है?

जनार्दन अक्सर अपने बयानों के चलते सुर्खियों में रहते हैं. सांसद जनार्दन मिश्र ने कहा कि मैं सांसद ना होता तो चाकू चलाता, नशा करता. स्कूल में मारपीट करता था, बीड़ी-सिगरेट पीता था. जिसके चलते कई बार स्कूल से रिस्टीकेट भी हुआ हूं. 

बीजेपी सांसद जनार्दन मिश्र ने बताया कि वे अन्य छात्रों के साथ मारपीट करते थे और खूब बीड़ी-सिगरेट पीते थे. टीचर उनके मुंह से आने वाली बदबू से पकड़ लेते और सजा देते थे. उनकी इन हरकतों के चलते स्कूल से रेस्टीकेट भी किया गया था. उन्होंने कहा कि अगर शिक्षकों का साथ न मिला होता तो वो आज सांसद नहीं होते, बल्कि चाकू चलाते घूम रहे होते.

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बीजेपी सांसद ने क्यों दिया ऐसा बयान? 

दरअसल, सांसद जनार्दन मिश्र मॉडल स्कूल के स्वर्ण जयंती समारोह में शामिल होने पहुंचे थे. समारोह में छात्रों के साथ ही डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल भी मौजूद थे. मुख्य अतिथि के तौर पर सांसद जनार्दन मिश्रा भी कार्यक्रम में शामिल थे. उन्होनें लोगों को संबोधित करते हुए शिक्षकों का महत्त्व समझाते हुए ये बयान दिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

सांसद ने खोले स्कूल जीवन के राज

जनार्दन मिश्र ने अपने छात्र जीवन को याद कर लोगों से कहा कि छात्र जीवन में वो बिगड़ गए थे. बीड़ी पीने की आदत हो गई थी. अक्सर ही मारपीट करते थे, लेकिन स्कूल के प्रिंसिपल सिद्धिकी और शिक्षक रामानुज द्विवेदी के कारण वह सुधरे. उन्होंने बताया कि स्कूल में बीडी पीकर जाने पर शिक्षक ने पकड़ लिया, तब 7 दिन के लिए  रेस्टीकेट कर दिया था. इतना ही नहीं घर में भी बीड़ी पीने की शिकायत कर दी थी.  ऐसे ही मारपीट की शिकायत पर प्रिंसिपल ने प्रिंसिपल कक्ष में 5 दिनों तक किताब पढ़ने की सजा दी थी. सांसद ने कहा कि मैं जो भी ही हूं उन्हीं के बदौलत हूं, नहीं तो कही चाकू चला रहा होता. इसके पीछे शिक्षक का बड़ा योगदान है.

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